ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का पहला स्टेशन हुआ तैयार, ट्रेन का हुआ सफल ट्रायल

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राज्य और मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना का काम करीब-करीब पूरा हो चुका है। इस लाइन पर तैयार ऋषिकेश (rishikesh) स्टेशन को योग नगरी रेलवे (yognagri railway station) स्टेशन नाम दिया गया है। इस परियोजना का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके अलावा यहां ट्रेन का सफल ट्रायल भी हो चुका है, लेकिन इसकी फाइनल रिपोर्ट रेल सुरक्षा आयुक्त देंगे। उत्तराखंड की संस्कृति और पर्यटन के प्रचार प्रसार को बढ़ावा देने के लिए खुशी की बात यह है कि प्रदेश सरकार ने रेल विकास निगम से इस रेल मार्ग पर बनने वाले सभी रेलवे स्टेशनों को पर्वतीय शैली में बनाने को कहा है। रेल विकास निगम ने उनके इस अनुरोध को स्वीकार भी कर लिया है। वैसे ऋषिकेश में इस परियोजना का पहला रेलवे स्टेशन तैयार भी हो चुका है ।

योगनगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन की जुड़ी खास बात
योगनगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन का गुंबद केदारनाथ धाम की तरह डिजाइन किया गया है। इसके अलावा यहां आरबीएनएल की तरफ से भगवान शिव और उनके वाहन नंदी की विशाल मूर्ति स्थापित की गई है। इन मूर्तियों को परिधा मूर्ति कला केंद्र, हरिद्वार में आकार दिया गया है। स्टेशन के केदारनाथ प्रतिरूप के सामने पांच फुट के ऊंचे चबूतरे पर 12 फीट उंची भगवान शिव की प्रतिमा विराजमान है। उनके सामने पांच फीट उंचे चबूतरे पर चार फीट ऊंची और तीन फीट चौड़ी नंदी महाराज की प्रतिमा विराजमान है। इसके अलावा इन रेलवे स्टेशनों पर प्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों, पर्यटन स्थलों व संस्कृति आदि को दर्शाया जाएगा। इसकी खास बात यह है​ कि यह सभी कार्य काष्ठ (लकड़ी) के न होकर निर्माण कार्यो में प्रयुक्त होने वाली निर्माण सामग्री से ही किए जाएंगे।

yognagri rishikesh railway station

बता दें कि इस मार्ग में वीरभद्र, न्यू ऋषिकेश, शिवपुरी, बयासी, देवप्रयाग, मलेथा, श्रीनगर, धारी देवी, रुद्रप्रयाग, घोलतीर, गौचर व कर्णप्रयाग 12 रेलवे स्टेशन हैं। कर्णप्रयाग रेल लाइन को पर्वतीय जिलों के साथ ही सामरिक दृष्टि से भी बेहद अहम माना जा रहा है। जिस से आर्थिकी स्थिति तो सुधरेगी ही, साथ में यह परियोजना दो अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं से सटे इस हिमालयी राज्य के सीमांत क्षेत्रों में सामरिक स्थिति मजबूत करने में मददगार साबित होगी। कुल मिलाकर पलायन से बेहाल उत्तराखंड में रिवर्स पलायन के लिए इसे लाइफलाइन रेलवे परियोजना कह सकते हैं। सरकार ने तय किया है कि साल 2024 तक इस रेल नेटवर्क को पूरी तरह तैयार कर 2025 से इस पर ट्रेन चलानी भी शुरू कर दी जाएगी।

मां राजराजेश्वरी रेलवे स्टेशन होगा श्रीनगर का नाम
जहां प्रत्येक स्टेशन में पहाड़ की संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी वही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन में श्रीनगर में बनने वाले रेलवे स्टेशन का नाम श्रीनगर के नाम पर ना होकर मां राजराजेश्वरी रेलवे स्टेशन होगा। दरअसल, यह रेलवे स्टेशन श्रीनगर से थोड़ा आगे चौरास के पास बनेगा, इसलिए इसका नाम मां राजराजेश्वरी के नाम पर रखने की योजना है।

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Web Title yognagri rishikesh railway station

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