जल्द ही भार मुक्त होगा अंग्रेजों का बनाया 142 साल पुराना मंडी का ऐतिहासिक विक्टोरिया पुल

by Ravinder Singh

मंडी जिले का 142 वर्ष पुराना ऐतिहासिक विक्टोरिया पुल (victoria bridge) अब जल्द ही भार मुक्त (load free) होने जा रहा है। जल्द ही इस पुल पर वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। दरअसल विक्टोरिया पुल के समानांतर एक अन्य पुल का निर्माण कार्य किया जा चुका है। नए पुल के बनने से विक्टोरिया से गुजरने वाले वाहन अब नए पुल से होकर जाएंगे। वाहनों को नए पुल पर डायवर्ट करने के बाद विक्टोरिया पुल को सिर्फ पैदल चलने वालों के लिए रखा जाएगा और समय-समय पर इसकी उचित मरम्मत और देखरेख की जाएगी।

उद्घाटन का इंतजार

करीब 25 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुए नए का पुल के उद्घाटन के लिए मुख्यमंत्री का इंतजार किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने पुल के उद्घाटन के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से समय मांगा है। बताया जा रहा है कि इस महीने के आखिर या अगले महीने के पहले सप्ताह में इस पुल काे विधिवत रूप से शुरू कर दिया जाएगा। जिसके बाद विक्टोरिया पुल को यातायात से मुक्त कर दिया जाएगा। इसके बाद सरकार द्वारा विक्टोरिया पुल को एक धरोहर के रूप में सहेजा जाएगा।

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अंग्रेजों ने किया था निर्माण

बता दें कि इस ऐतिहासिक पुल का निर्माण 1877 में अंग्रेजो द्वारा कराया गया था। अंग्रेजों ने एक लाख रुपये की लागत में इस पुल का निर्माण किया था। यह पुल इंग्लैंड में बने विक्टोरिया पुल की तरह बनाया गया था। इसलिए अंग्रेजों ने इस पुल को विक्टोरिया पुल का नाम दिया, जबकि मंडी रियासत ने इसे ‘विजय केसरी पुल’ का नाम दिया था। दरअसल अंग्रेजों के शासन में दिल्ली में घोड़ों और कारों की रेस लगवाई गई थी। इस रेस में भाग लेने के लिए देश भर की रियासतों के राजाओं को बुलाया गया था। मंडी के राजा विजय सेन के घोड़े ने कार को पछाड़ते हुए जीत हासिल की थी। इस जीत के बाद अंग्रेजों ने राजा वियज सेन को कार ईनाम में दे दी। लेकिन पुल न होने के कारण कार को मंडी लाना संभव नहीं था। इसलिए राजा वियज सेन ने ब्रिटिश हकुमत से मंडी शहर को जोड़ने के लिए एक पुल बनाने का आग्रह किया था।

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