पर्यटन उत्सव के लिए तैयार है शिमला के पास तत्तापानी, मकर संक्रांति पर उमड़ेगा आस्था का सैलाब

by Ravinder Singh

हिमाचल प्रदेश (himachal pradesh) की राजधानी शिमला से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित तत्तापानी में मकर संक्रांति पर होने वाले तत्तापानी पर्यटन उत्सव (tattapani tourism festival) की इन दिनों तैयारियां की जा रही हैं। तत्तापानी मंडी-शिमला जिले की सीमा पर करसोग उपमंडल में सतलुज नदी किनारे स्थित है। यह स्थान सतलुज के किनारे से फूटते गर्म सल्फरयुक्त पानी के लिए मशहूर है। इसे ऋषि जमदग्नि की तपोस्थली भी माना जाता है। तत्तापानी में हर साल मकर संक्रांति पर धार्मिक और साहसिक पर्यटन का अनूठा संगम देखने को मिलता है। इस दिन यहां आस्था का सैलाब उमड़ता है। हजारों की संख्या में लोग तत्तापानी के मशहूर गर्म पानी के चश्मों में डुबकी लगाते हैं। इस दौरान यहां कई वाटर स्पोर्ट्स भी होते हैं।

राहु का पूजन

दरअसल मान्यता है कि मकर संक्रांति पर तत्तापानी के पवित्र गर्म पानी के चश्मों में डुबकी लगाने से शनि, राहु और केतू ग्रहों के कारण होने वाले परेशानियों से राहत मिलती है। राहु की दशा को शांत कराने के लिए तीन बार स्नान कराया जाता है। पहली बार स्नान कराने के बाद काले कपड़े पहनाए जाते हैं। इसके बाद राहु का पूजन कराया जाता था। फिर ग्रह से परेशान व्यक्ति को अनाज, लोहा, माश की दाल, सरसों के तेल के साथ तोला जाता है। इसके बाद फिर से स्नान कराया जाता है। इसके बाद सूर्य की पूजा कराई जाती है। माना जाता है कि ऐसा करने से राहु की दशा शांत हो जाती है।

tattapani tourism festival

Source – Loop-Whole

चश्मों की मान्यता

तत्तापानी के सल्फरयुक्त गर्म पानी में स्नान करने से चर्म रोगों से भी मुक्ति मिलती है। इसके अलावा यहां तोला दान का बड़ा महत्व है। ग्रहों की शांति के लिए यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आकर तुलादान करते हैं। एक तरफ खून जमा देने वाली सतलुज की ठंडे पानी की तेज धारा, तो दूसरी तरफ उसी के नजदीक गर्म पानी चश्मे लोगों के लिए आश्चर्य का विषय हैं। हालांकि गर्म पानी चश्मों को लेकर मान्यता है कि इस जगह पर भगवान परशुराम ने स्नान करने के बाद अपने वस्त्र निचोड़े थे। जिसके बाद यहां गर्म पानी के चश्मे फूट पड़े थे।

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