विश्व धरोहर कालका शिमला रेलवे ट्रैक पर दौड़ा 115 साल पुराना ऐतिहासिक स्टीम इंजन

by Ravinder Singh

विश्व धरोहर कालका शिमला रेलवे ट्रैक (kalka shimla railway track) पर बीते बुधवार को 115 साल पुराने ऐतिहासिक ‘स्टीम लोकोमोटिव इंजन केसी 520’ (steam Locomotive engine kc 520) ने दौड़ लगाई। स्टीम इंजन (steam engine) सुबह करीब 11 बजे शिमला से कैथलीघाट के लिए रवाना हुआ। कैथलीघाट पर करीब एक घंटे तक रुकने के बाद स्टीम इंजन वापस शिमला के रवाना हुआ। शिमला से कैथलीघाट तक 21 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर स्टीम इंजन के साथ दो लग्जरी कोच सीटी 12, 13 जोड़े गए थे। इसकी बुकिंग ब्रिटिश सैलानियों ने करवाई थी। ब्रिटिश सैलानी इसमें सफर करके काफी खुश नजर आए। उन्होंने स्टीम इंजन के साथ फोटो भी खिंचवाया।

सैलानियों ने लिया भरपूर आनंद

शिमला रेलवे के स्टेशन अधीक्षक ने बताया कि सात ब्रिटिश सैलानियों स्टीम इंजन की बुकिंग करवाई थी। ट्रेन में सवार होकर ब्रिटिश सैलानियों ने हरे-भरे पेड़ों, घुमावदार रास्तों और हरियाली का जमकर मजा लिया। उन्होंने यहां की हसीन वादियों को करीब से निहारा और खूबसूरत नजारों को अपने कैमरे में कैद किया। वहीं कंपनी के डायरेक्टर ने बताया कि ब्रिटिश सैलानियों ने इसमें सफर का भरपूर आनंद लिया। शिमला से कैथलीघाट तक स्टीम इंजन के टूअर का आयोजन ‘ट्रैवल पलज इंडिया’ ने किया।

steam locomotive engine kc 520

Source – The Tribune

छुक-छुक की आवाज

सुबह जैसे ही स्टीम इंजन रेलवे यार्ड से निकलकर प्लेटफार्म पर पहुंचा, लोग छुक छुक की आवाज इसको देखने के लिए पहुंच गए। कालका से तीन ड्राइवर हंसराज ठाकुर, जगपाल, नवरत्न और गौरव कुमार शिमला पहुंचे थे। गौरतलब है कि रेल का पर्याय मानी जाने वाली छुक-छुक की आवाज सिर्फ स्टीम इंजन से पैदा होती है। स्टीम इंजन में बजने वाली सीटी भाप के दबाव से बजती है।

अंग्रेजों ने चलाया था

बता दें कि यह स्टीम इंजन 115 साल पुराना है। इसे 1905 में अंग्रेजों ने शिमला से कैथलीघाट के बीच चलाया था। 1971 के बाद यह इंजन 30 सालों तक वर्कशॉप में खड़ा रहा। इसके बाद 2001 में दोबारा बन कर तैयार हुआ। 41 टन वजनी इंजन में 80 टन तक खींचने की क्षमता है।

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Web Title steam locomotive engine kc 520 raced on kalka shimla route

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