कोरोना संक्रमण के चलते सोलन में मां शूलिनी देवी को समर्पित मेले को भी किया गया रद्द

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हिमाचल प्रदेश (himachal) के सोलन (solan) जिले में 19 जून को मां शूलिनी (shoolini) को समर्पित राज्य स्तरीय शूलिन मेले (fair) का आयोजन इस बार नहीं किया गया। कोविड 19 के बढ़ते हुए खतरे को देखते हुए ऐसा किया गया। हालांकि हर साल की तरह इस बार भी मंदिर में परंपरागत तरीके से पूजा-अर्चना की गई। इस बार श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था की गई थी। जिसमें श्रद्धालुओं ने पूजा को संपन्न होते हुए देखा। यह प्रसारण यू ट्यूब और फेसबुक पर लाइव दिखाया गया।

मंदिर में पूजा का कार्य पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की की मौजूदगी में संपन्न हुआ। बताते चलें कि प्रदेश में जितने भी पारंपरिक मेलों का आयोजन होता है, उनमें माता शूलिनी मेले का प्रमुख स्थान है। बदलते परिवेश के बावजूद यह प्राचीन परंपरा का रंग देखने को मिलता है। ऐसी मान्यता है कि माता शूलिनी के प्रसन्न होने से क्षेत्र में किसी तरह की आपदा या महामारी का प्रकोप नहीं फैलता है।

shoolini fair solan himachal

यह है मेले के आयोजन का इतिहास
सोलन शहर माता शूलिनी देवी के नाम से बसा हुआ है। ऐसा कहा जाता है कि सोलन नगर बघाट रियासत की राजधानी हुआ करती थी, जिसकी नींव राजा बिजली देव ने रखी थी। बारह घाटों से मिलकर बनने वाली बघाट रियासत की शुरूआत में राजधानी जौणाजी, उसके बाद कोटी और बाद में सोलन बनी। राजा दुर्गा सिंह इस सियासत के अंतिम शासक थे। रियासत के विभिन्न शासकों के काल से माता शूलिनी देवी का मेला लगता आ रहा है। ऐसा कहा जाता है कि रियासत के शासक अपनी कुलश्रेष्ठता के लिए मेले को लगाते थे।

पुराने समय में सोलन मेला केवल एक दिन आषाढ़ मास के दूसरे रविवार को माता के मंदिर के पास खेतों में मनाया जाता था। सोलन जिले के अस्तित्व में आने के बाद से इसे पर्यटन की दृष्टि से बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तरीय मेले का दर्जा दिया गया। वर्तमान में माता शूलिनी देवी का मंदिर शहर के दक्षिण में है। इस मंदिर में माता शूलिनी के अलावा शिरगुल देवता, माली देवता आदि की प्रतिमाएं मौजूद हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार माता शूलिनी सात बहनों में से एक हैं। अन्य बहनें हिंगलाज देवी, जेठी ज्वाला जी, लुगासना देवी, नैना देवी और तारा देवी के नाम से विख्यात हैं।

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Web Title  state level shoolini fair was not held in solan himachal pradesh

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