जल देवता के रूप में पूजे जाते हैं मोस्टा देवता, इस मंदिर में विज्ञान के नियम भी हो जाते हैं फेल

by admin

उत्तराखंड (uttarakhand) के पिथौरागढ़ (pithoragarh) में सोरघाटी का प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल मोस्टामानू मंदिर (mostamanu temple) जिला मुख्यालय से 9 किलोमीटर की दूरी पर है। मोस्टा देवता को जल देवता के रूप में पूजा जाता है। उन्हें इंद्र का पुत्र माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इनकी पूजा करने से बरसात हो जाती है। वहीं मोस्टा देवता के लिए साल में एक बार आयोजित होने वाले मेले में आप विज्ञान के नियमों को फेल होते देख सकते हैं। वहां हर साल कुछ लोग उंगलियों पर पत्थर उठा लेते हैं, जिसे भगवान शिव के मंत्रोच्चारण के बाद ही उठा पाना संभव होता है।

बरसात के लिए होती है मोस्टा देव की पूजा
पर्वत शिखर, चौड़ी घाटियां और हरे भरे जंगल से घिरे मोस्टा मानू मंदिर में जाकर मन को असीम शांति मिलती है। मोस्टा देवता को इंद्र देव का पुत्र माना जाता है। इनकी माता का नाम कालिका है। जो भूलोक में मोस्टा देवता के साथ रहती हैं। ऐसा कहा जाता है कि एक बार जब पिथौरागढ़ सोर क्षेत्र में भयंकर सूखा पड़ गया था, उस समय वहां के पंडितों और पुजारियों ने मोस्टा देव की पूजा अर्चना की सलाह दी थी। उनका हवन पूरा होते ही चारों तरफ बादल घिर आए थे और खूब बारिश हुई थी। ऐसा कहा जाता है कि जब कभी बरसात नहीं होती तो यहां के लोग मोस्टा देव की ही पूजा करते हैं और वहां बरसात हो जाती है।

mostamanu temple pithoragarh uttarakhand

Photo Source – Patrika

मोस्टा देव के मंदिर में होता है चमत्कार
मोस्टामानू मंदिर का निर्माण 1926 में हुआ था। यहां हर साल ऋषि पंचमी के दिन वार्षिक मेले का आयोजन होता है। जिसमें मोस्टा देवता का डोला ढोल-नगाड़ों और शंख ध्वनि के साथ निकाला जाता है। इस मेले में विशाल पत्थर को उंगली से उठाने की होड़ लगती है। जिसे केवल वही उठा पाते हैं, जो भगवान शिव में अगाद्ध श्रद्धा रखते हैं और उनका मंत्रोच्चारण करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस पत्थर को कई बार बाहुबली भी नहीं उठा पाते। यह चमत्कार कैसे होता है, वैज्ञानिक भी इस बात का पता नहीं लगा पाए हैं।

कैसे पहुंचें मोस्टामानू मंदिर
पिथौरागढ़ से 9 किलोमीटर की दूरी पर मोस्टा मानू मंदिर स्थित है। सड़क मार्ग यहां पहुंचने का बेहतर विकल्प है। उत्तराखंड परिवहन बस निगम की मदद से आईएसबीटी से सीधे पिथौरागढ़ आसानी से पहुंचा जा सकता है। रेल सेवा की बात करें तो टनकपुर रेलवे स्टेशन तक पहुंचने के बाद 138 किलोमीटर की दूरी बस से तय करने के बाद पिथौरागढ़ पहुंचा जा सकता है। वहीं गाजियाबाद से पिथौरागढ़ विमान से पहुंचने के लिए हवाई उड़ान की सुविधा भी है।

Uttarakhand में इन प्रसिद्ध स्थलों के बारे में भी जानें

Web Title mostamanu temple is a famous sightseeing place of sorghati in pithoragarh uttarakhand

(Religious Places from The Himalayan Diary)

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