उत्तरकाशी में टोंस नदी के किनारे बसे मोरी में प्रकृति की गोद में लें एडवेंचर का मजा

by Ravinder Singh

अगर आप भीड़-भाड़ से दूर शांत वातावरण में प्रकृति के बीच ट्रेकिंग, जंगल की सैर, चट्टानों पर चढ़ने और रेप्लिंग का आनंद उठाना चाहते हैं, तो उत्तराखंड (uttarakhand) के उत्तरकाशी जिले में मोरी (mori) बेहतरीन पर्यटन स्थल (tourist spot) साबित होगा। दिल्ली से लगभग 410 किलोमीटर की दूरी पर मोरी उत्तरकाशी जिले के बेहतरीन हिल स्टेशनों (hill station) में से एक है। मोरी अपनी अद्भुत प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है। समुद्र तल से 3700 फीट की ऊंचाई पर स्थित मोरी जौनसर बावर क्षेत्र में टोंस नदी के किनारे बसा हुआ है। टोंस नदी तमस नदी के नाम से भी जानी जाती है। इस जगह को टोंस घाटी का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है।

प्राकृतिक संपदा

मोरी का शांत वातावरण, साफ हवा और खुशनुमा मौसम इसे अन्य पर्यटन स्थलों से अलग बनाता है। यह स्थान हरे भरे देवदार के जंगलों से घिरा हुआ है। मोरी में ही एशिया का सबसे लंबा देवदार का जंगल है। हरे-भरे धान के खेत, बहती टोंस नदी, खूबसूरत झीलें इसे और भी खूबसूरत बनाते हैं। यह क्षेत्र शिविर के लिए एक आदर्श स्थान है। यहां पर्यटक टोंस नदी में एन्गलिंग, राफ्टिंग और कयाकिंग जैसे साहसिक खेलों का आनंद भी उठा सकते हैं। इसके अलावा रॉक क्लाइंबिंग, ट्रेकिंग, जंगल की सैर, चट्टानों पर चढ़ना और रेप्लिंग का मजा लेने के लिए भी पर्यटक यहां पर आते हैं। चिड़ियों की चहचहाहट, वनस्पति और जीव-जंतु पर्यटकों को चौका देते हैं।

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पौराणिक महत्व

मोरी प्राकृतिक संपदा के साथ-साथ प्राचीन मंदिरों और बेहतरीन वास्तुशिल्प से भी समृद्ध है। इस क्षेत्र के निवासी कौरवों तथा पांडवों को अपना पूर्वज मानते हैं। यहां कौरवों और पांडवों की पूजा की जाती है। पास के जाखोल गांव में दुर्योधन का मंदिर है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण सौर गांव के निवासियों ने करवाया था। क्षेत्र में रहने वालों के अनुसार यहां बहने वाली टोंस नदी महाभारत के पात्र भुब्रुवाहन के आंसुओं से बनी है। लोगों का मानना है कि आज भी नदी में भुब्रुवाहन के आंसू बह रहे हैं। इसलिए वह इस नदी का पानी नहीं पीते। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि यह नदी रामायण के पात्र शूर्पणखा के आंसुओं से बनी है।

कैसे पहुंचें मोरी

मोरी में कई निजी रिसॉर्ट्स हैं, जो शिविर या कैम्पिंग पर्यटकों को उपलब्ध कराते हैं। मोरी में ट्रेकिंग करने के लिए गर्मी और राफ्टिंग, कयाकिंग करने के लिए बारिश का मौसम सबसे सही है। मोरी से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा लगभग 175 किलोमीटर दूर देहरादून में है। देहरादून, मसूरी सहित आसपास के शहरों से मोरी आने के लिए बसों की सुविधा उपलब्ध है।

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