उत्तराखंड के पौड़ी में कंडोलिया देवता के रूप में पूजे जाते हैं भगवान भोलेनाथ, भूम्याल देव भी कहे जाते हैं

by Ravinder Singh

देवों की भूमि उत्तराखंड में भगवान शिव को बड़ी श्रद्धा से पूजा जाता है। यहां हर क्षेत्र में भगवान शिव के ऐतिहासिक मंदिर हैं। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में भगवान शिव को अलग-अलग रूपों में पूजा जाता है। उत्तराखंड (uttarakhand) के पौड़ी (pauri) में भगवान शिव को कंडोलिया देवता (kandolia dev) के रूप में पूजा जाता है। पौड़ी शहर से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर ओक और पाइन के घने जंगल में कंडोलिया देवता का पवित्र और प्राचीन मंदिर है। कंडोलिया देव को स्थानीय भूमि देवता यानि भूम्याल देव भी कहा जाता है। मंदिर के निकट एक खूबसूरत पार्क, खेल परिसर और कुछ मीटर आगे एशिया की सबसे ऊंची स्टेडियम रान्शी है। यहां से हिमालय की चोटियों और गंगवारस्यून घाटी का मनोरम नजारा देखने को मिलता है।

मंदिर का इतिहास

मान्यता है कि सालों पहले कुमांऊ की रहने वाली एक युवती का विवाह पौड़ी गांव में डुंगरियाल नेगी जाति के युवक से हुआ था। विवाह के बाद युवती अपने साथ अपने ईष्टदेव को कंडी यानि छोटी सी टोकरी में रखकर पौड़ी लेकर आई थी। इसके बाद से कुमाऊं के इन देवता को कंडोलिया देवता के नाम जाना जाने लगा और उनकी पूजा पौड़ी गांव में भी शुरू कर दी गई। कुछ समय बाद देवता ने स्थानीय नागरिक को सपने में दर्शन दिए और स्वयं को नगर के शिखर पर स्थापित करने के लिए कहा। इसके बाद पौड़ी नगर के शीर्ष शिखर पर ईष्ट देवता की स्थापना की गई और स्थानीय क्षेत्रपाल के रूप में देवता की पूजा की जाने लगी।

न्याय के देवता

कंडोलिया देवता का मंदिर इस क्षेत्र की आस्था का मुख्य केंद्र है। स्थानीय लोग कंडोलिया देवता को न्याय के देवता के रूप में भी पूजते हैं। मान्यता है कि जब सभी ओर से न्याय मिलने की उम्मीद खत्म हो जाती है, तब कंडोलिया देवता की शरण में आने से न्याय मिलता है। कंडोलिया देवता के आशीर्वाद से लोगों की हर मनोकामना पूरी होती है। यहां हर साल भंडारे का भी आयोजन होता है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां हर साल तीन दिवसीय विशेष पूजा-हवन कार्यक्रम आयोजित होता है।

kandolia dev pauri

Source – TripAdvisor

प्राकृतिक खूबसूरती

कंडोलिया देवता मंदिर के आसपास की प्राकृतिक खूबसूरती भी देखने लायक होती है। यहां से हिमालय की चोटियों और गंगवारस्यून घाटी का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है। सुरम्य पहाड़ों के बीच बसे इस मंदिर में आने पर श्रद्धालु को शांति और असीम आनंद का अहसास होता है।

कैसे पहुंचें कंडोलिया देवता के मंदिर

यह मंदिर पौड़ी शहर से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पौड़ी बस अड्डे से मंदिर के लिए आसानी से वाहन मिल जाते हैं। आप इस दूरी को पैदल भी तय कर सकते हैं। पौड़ी से नजदीकी रेलवे स्टेशन 105 किलोमीटर दूर कोटद्वार और 112 किलोमीटर दूर ऋषिकेश में स्थित है। पौड़ी से निकटतम हवाई अड्डा लगभग 130 किलोमीटर दूर देहरादून में है। पौड़ी के लिए उत्तराखंड के प्रमुख शहरों से आसानी से बस मिल जाती हैं।

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Web Title lord shiva is worshiped as kandolia dev in pauri uttarakhand

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