युद्ध के मैदान से पर्यटन का क्षेत्र बना कारगिल, पर्यटकों की संख्या पहुंची लाखों में

by Content Editor

kargil travel – कारगिल की भूमि पर 1999 में लड़ा गया भारत-पाकिस्तान का युद्ध भला ही कोई भूल पाएगा। ​इस युद्ध में भारत ने जीत हासिल की थी, जिस वजह से 26 जुलाई को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। युद्ध की वजह से कारगिल लोगों की नजरो में आया। पिछले 20 सालों में कारगिल, युद्ध क्षेत्र से पर्यटन केंद्र बन गया है। कारगिल, जम्मू एवं कश्मीर का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह जगह मुख्य रूप से बौद्ध पर्यटन केंद्र के लिए जाना जाता है। यहां बौद्धों के कई प्रसिद्ध मठ स्थित हैं।
युद्ध के एक साल बाद 2000 में यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या लगभग 300 थी। हालांकि, 2018 में पर्यटकों की संख्या लगभग एक लाख तक बढ़ गई। कारगिल हमेशा एक शांत शहर रहा है। यह सिल्क रूट व्यापार नेटवर्क के तौर पर जाना जाता है, लेकिन इस शहर में आने वाले सभी लोग लगभग 60 किलोमीटर दूर कारगिल वॉर मेमोरियल “कॉल ऑफ ड्यूटी” को देखने आते हैं। यह स्थान श्रीनगर से 205 किलोमीटर की दूरी पर है।kargil travel
कारगिल में 1999 तक केवल 5-6 होटल थे। लेकिन आज यहां 250 से अधिक होटल हैं, जिनमें 40 अच्छी गुणवत्ता वाले और गेस्टहाउस शामिल हैं। कारगिल में घूमने के मुख्य आकर्षण में कई जगहे हैं।

कारगिल में घूमने की प्रसिद्ध जगहें (kargil travel )

मुलबेख गोम्पा
मुलबेख गोम्पा एक मठ है। यह मठ कारगिल जिले के मुलबेख में है। मुलबेख कारगिल से लगभग 45 किलोमीटर और लेह से 190 किलोमीटर की दूरी पर है। यह मठ समुद्र तल से 200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां भित्तिचित्र, मूर्तियां और स्मृति चिन्ह इस मठ की शोभा को और अधिक बढ़ाते हैं।
शरगोल मठ
शरगोल मठ कारगिल जिले से दस किलोमीटर की दूरी पर मुलबेस में है। इस पुरानी गी-लुग पा बौद्ध मठ में कई बेहतरीन भित्तिचित्र देखे जा सकते हैं।
स्टोंगदे मठ
स्टोंगदे दूसरा बड़ा मठ है, जोकि काफी पुराना मठ है। इस मठ की नींव तिब्बतन योगी मारपा ने रखी थी। इस मठ में काफी संख्या में मंदिर बने हुए हैं।
नुन-कुन गिरीपिण्ड
नुन-कुम मासिफ विशाल हिमालय पंक्ति है। यह लद्दाख का सबसे ऊंचा शिखर है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई लगभग 7,077 मीटर है। कारगिल के दक्षिण में इस जगह की दूरी 70 किलोमीटर है।
कनिक स्तूप
कनिक स्तूप कारगिल जिले के सनी पर है। इस स्तूप का सम्बन्ध प्रसिद्ध भारतीय योगी नारूपा से है। ऐसा माना जाता है कि इन संत ने इस स्तूप के भीतर रहकर कुछ समय तक ध्यान साधना की थी।

यहां कैसे पहुंचे

श्रीनगर-लेह मार्ग द्वारा कारगिल पहुंचा जा सकता है। पर यह मार्ग जून के मध्य से नवंबर तक खुला रहता है। जम्मू व कश्मीर राज्य परिवहन निगम की सामान्य व डिलक्स बसें नियमित रूप से इस मार्ग पर चलती हैं। इसके अलावा श्रीनगर से टैक्सी द्वारा भी कारगिल पहुंचा जा सकता है। रेल द्धारा भी यहां पहुचां जा सकता है। इसके सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन जम्मू तवी है। वायुमार्ग के लिए आप इसके सबसे निकटतम हवाईअड्डा लेह में पहुंच सकते हैं। दिल्ली, चंडीगढ़, श्रीनगर और जम्मू से लेह के लिए नियमित रूप से उड़ानें भरी जाती है।

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