कोरोना से बचाने के लिए इस बार नहीं लगेगा मंडी में देव कमरूनाग और पराशर ऋषि का मेला

by admin

कोरोना वायरस के प्रकोप से विश्व में कुछ भी अछूता नहीं रह गया है। इसका असर इस बार हिमाचल (himachal) के मंडी जिले में (mandi) में हर साल लगने वाले देव कमरूनाग (dev kamrunag) और पराशर (parashar) ऋषि के मेले (fair) पर भी पड़ा है। इस साल कमरूनाग और पराशर मेला नहीं लगाया जाएगा। इन दोनों ही वार्षिक मेलों में लाखों लोग आते हैं। हर साल यहां भारी संख्या में लोगों की भीड़ देखने को मिलती है, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते केंद्र सरकार ने इस मेले पर रोक लगा दी है।

डीसी मंडी के अनुसार सरकार के दिशानिर्देशों के अंतर्गत मेलों का आयोजन नहीं किया जा सकता है। देव कमरूनाग के पुजारी हेतराम के अनुसार इस बार मेला आयोजित नहीं किया जा रहा है, लेकिन उस दिन पूजा का कार्य विधिपूर्वक संपन्न होगा। मंदिर कमिटी के कुछ लोग देव कमरूनाग के मूल स्थान पर जाकर परंपराओं को निभाते हुए पूजा-अर्चना करेंगे। मेले के दौरान मंदिर जाने वाले सभी रास्तों पर पुलिस और स्थानीय लोगों के जरिए पहरा लगा दिया जाएगा। मेलों का आयोजन 14 जून को किया जाना था। बताते चलें कि देव कमरूनाग को मंडी का आराध्य देव माना जाता है और इन्हें बड़ादेव कह कर भी पुकारा जाता है। दूसरी तरफ पराशर ऋषि मंदिर में भी उसी दिन मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में लाखों श्रद्धालु एकत्रित होकर अपने आराध्य की पूजा करते हैं।

Kamrunag Parashar Fair Mandi

क्यों लगाया जाता है मेला 
मेले में हजारों लोग कमरूनाग की पवित्र झील में डुबकी लगाते हैं। कमरूनाग महाभारत कालीन योद्धा रतन यक्ष थे। भगवान कृष्ण ने अपनी लीला से उनका शीश उन्हीं से दान में लिया था। यक्ष ने कटे हुए शीश से महाभारत का युद्ध देखने की इच्छा जाहिर की थी। युद्ध के बाद कृष्ण ने उस शीश को पांडवों को दे दिया और उसे उनका ठाकुर घोषित किया। पांडव उस शीश को डंडे पर लटका कर मंडी जिले के रोहांडा और वर्तमान कमरूधार लेकर पहुंचे। मंडी-करसोग मार्ग पर रोहांडा बस ठहराव से 6 किलोमीटर ऊपर 9000 फुट की ऊंचाई पर झील का एकांत स्थल पसंद आया। पांडवों ने यहीं पर उसकी देव रूप में स्थापना कर दी। घने जंगल से घिरी यह झील कमरूनाग के नाम से प्रसिद्ध हो गयी। लोग उन्हें वर्षा का देवता मानते हैं तो कुछ उन्हें भगवान विष्णु का अवतार मानते हैं। वहीं पराशर झील के निकट हर वर्ष आषाढ की संक्रांति व भाद्रपद की कृष्णपक्ष की पंचमी को विशाल मेले लगते हैं। भाद्रपद में लगने वाला मेला पराशर ऋषि के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

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Web Title kamrunag-and-parashar-fair-will-not-be-held-in-mandi-himachal-pradesh

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