दुनिया में सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित धार्मिक स्‍थलों में से एक है श्रीखंड महादेव पर्वत

by Ravinder Singh

देवभूमि हिमाचल प्रदेश (himachal pradesh) के कुल्‍लू (kullu) जिले में भगवान शिव को समर्पित श्रीखंड महादेव (shrikhand mahadev) दुनिया के सबसे ऊंचाई पर स्थित धार्मिक स्‍थलों में से एक है। समुद्रतल से लगभग 18,300 फीट की ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड महादेव पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 25 किलोमीटर की सीधी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। श्रीखंड महादेव मंदिर की यात्रा को अमरनाथ यात्रा से भी दुर्गम माना जाता है। बावजूद इसके बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रीखंड महादेव के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। लोगों का विश्वास है कि इस स्थान पर भगवान शिव का वास है। श्रीखंड पर्वत को पंच कैलाशों में से एक माना जाता है। यहां प्राकृतिक शिवलिंग स्थापित है।

पौराणिक कथा

मान्यता है कि भस्मासुर नाम के राक्षस को भगवान शिव से वरदान मिला था कि वह जिस भी जीव के सिर पर हाथ रखेगा वह भस्म हो जाएगा। वरदान पाकर भस्मासुर घमंडी हो गया और भगवान शिव को ही भस्म करने की कोशिश करने लगा। ऐसे में भगवान शिव ने भस्मासुर से बचने के लिए निरंमंड के देओढांक में स्थित एक गुफा में शरण ली। भगवान शिव कई महीनों तक इस गुफा में रहे। जब भगवान विष्‍णु ने मोहिनी नाम की एक सुंदर महिला का रूप धारण कर भस्मासुर का वध कर दिया, तो सभी देवता गुफा के बाहर पहुंचे और भगवान शिव से बाहर आने की विनती की। लेकिन भगवान शिव गुफा से बाहर नहीं आ पा रहे थे। जिसके बाद वह एक गुप्त रास्ते से होते हुए इस पर्वत की चोटी पर शक्ति रूप में प्रकट हो गए। मान्यता है कि जब भगवान शिव यहां से जाने लगे तो एक जोरदार धमाका हुआ। जिसके बाद शिवलिंग आकार की एक विशाल शिला बच गई। इसे ही शिवलिंग मानकर उसके बाद पूजा जाने लगा। इसके साथ ही यहां दो अन्य चट्टाने भी हैं, जिन्हें मां पार्वती और भगवान गणेश के नाम से पूजा जाता है।

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Source – indiatoday

श्रीखंड महादेव की यात्रा

श्रीखंड महादेव की यात्रा के मार्ग में निरमंड में सात मंदिर, जाओं में माता पार्वती का मंदिर, परशुराम मंदिर, दक्षिणेश्वर महादेव, हनुमान मंदिर अरसु, जोताकली, बकासुर वध, ढंक द्वार जैसे पवित्र स्थान भी आते हैं। मार्ग में में आने वाले पार्वती बाग में श्रद्धालुओं को दुर्लभ ब्रह्म कमल के दीदार होते हैं। यहां पार्वती झरना भी दर्शनीय है। माना जाता है कि मां पार्वती इस झरने का स्नानागार के रूप में इस्तेमाल करती थीं। बता दें कि श्रीखंड महादेव की यात्रा बेहद दुर्गम मार्ग से होकर गुजरती है। यहां ऑक्सीजन की कमी के चलते कई बार श्रद्धालुओं की मौत भी हो जाती है। जिसके बाद श्रीखंड महादेव ट्रस्ट ने यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की आयु सीमा भी तय की गई है। साथ ही ट्रस्ट ने यह भी तय किया है कि किसी भी यात्री को उनकी फिटनेस देखकर ही श्रीखंड महादेव की यात्रा के लिए अनुमति दी जाएगी। ट्रस्ट, प्रशासन के सहयोग से श्रीखंड महादेव यात्रा का आयोजन करता है। यात्रा के तीन पड़ाव – सिंहगाड़, थाचड़ू, और भीम डवार हैं।

कैसे पहुंचें श्रीखंड महादेव

श्रीखंड महादेव तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कई पड़ाव पार करके यात्रा करनी पड़ती है। सबसे पहले शिमला जिले के रामपुर से कुल्‍लू जिले के निरमंड होकर बागीपुल और जाओं तक गाड़ियों और बस से पहुंचना पड़ता है। यहां से आगे करीब 30 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। श्रीखंड महादेव से नजदीकी हवाई अड्डा लगभग 53 किलोमीटर दूर भुंतर हवाई अड्डा है। वहीं 76 किलोमीटर दूर शिमला में जुब्बारहट्टी हवाई अड्डा और छोटी लाइन का रेलवे स्टेशन भी है। इसके अलावा लगभग 90 किलोमीटर दूर जोगिंदरनगर में भी छोटी लाइन का स्टेशन है।

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Web Title information about shrikhand mahadev temple in kullu of himachal pradesh

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