अद्भुत प्राकृतिक खूबसूरती के बीच स्थित है सिखों का पवित्र स्थल श्री हेमकुंड साहिब

by Ravinder Singh

अगर आपको प्राकृतिक खूबसूरती और ऐतिहासिक धार्मिक स्थल का मिला-जुला संगम देखना हो, तो आपको एक बार उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित सिखों के एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थान हेमकुंड साहिब (hemkund sahib gurudwara uttarakhand) जरूर जाना चाहिए। समुद्री सतह से लगभग 4632 मीटर की ऊंचाई पर बना हेमकुंड साहिब एक बर्फ़ीली झील के किनारे सात पहाड़ों के बीच में स्थित है। इन पर्वतों को हेमकुंड पर्वत भी कहा जाता है। श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा 6 महीने तक बर्फ से ढका रहता है। सिखों की अटूट आस्था के प्रतीक श्री हेमकुंड साहिब की खूबसूरती देखने लायक होती है। यहां आकर आपको ऐसा लगेगा जैसे आप किसी अलग ही दुनिया में आ गए हो। यहां मौजूद पहाड़ों का रंग वायुमंडलीय स्थितियों के अनुसार अपने आप बदलता रहता है। यह चोटियां कभी सफेद, कभी सुनहरे रंग की, कभी लाल रंग की और कभी-कभी भूरे नीले रंग की दिखती हैं।

धार्मिक इतिहास

श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा सिखों के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। यहां पर सिखों के दसवें और अंतिम गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह ने साधना की थी। इस जगह का उल्लेख दसम ग्रंथ में भी है, जो कि स्वयं गुरु जी द्वारा लिखी गई है। इस जगह का इतिहास रामायण काल से भी जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि भगवान लक्ष्मण ने इसी जगह पर ध्यान लगाया था। श्री हेमकुंड साहिब पर स्थित झील और उसके आसपास के क्षेत्र को लोग ‘लोकपाल’ के नाम भी जानते है, जिसका अर्थ होता है ‘लोगों का निर्वाहक’। यह जगह दो सदियों से भी अधिक समय तक गुमनामी में रही। बाद में गुरु के तप स्थान की खोज में निकले सिखों द्वारा हेमकुंड की खोज की गई। आज हेमकुंड में जो गुरुद्वारा स्थित है उसकी स्थापना सन् 1960 के आस-पास की गई थी।

hemkund sahib gurudwara uttarakhand

प्राकृतिक सौंदर्य

श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा जितना पवित्र स्थान है, उतना ही खूबसूरत भी है। ऐसा लगता है जैसे प्रकृति ने दिल खोल कर इस जगह पर अपनी खूबसूरती लुटाई है। यहां स्थित तालाब लगभग 400 गज लंबा और 200 गज चौड़ा है। इस तालाब को अमृत सरोवर यानि अमृत का तालाब भी कहा जाता है। यहां आसपास स्थित बर्फ से ढकी पहाड़ियां बड़ी खूबसूरत नजर आती हैं। श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा जाने का रास्ता भी प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। रास्ते में आपको कई झरने भी देखने को मिलेंगे। इस पवित्र धार्मिक स्थल पर सिख ही नहीं, बल्कि हर धर्म के श्रद्धालु पहुंचते हैं।

कैसे पहुंचें श्री हेमकुंड साहिब

हेमकुंड साहिब तक की यात्रा की शुरुआत गोविंदघाट से होती है। जोशिमठ से करीब 20 किलामीटर की दूरी पर स्थित गोविंदघाट तक तो वाहन की मदद से आसानी से पहुंचा जा सकता है, लेकिन इसके आगे का सफ़र पैदल तय करना होता है। गोविंदघाट से नजदीकी हवाई अड्डा लगभग 290 किलोमीटर दूर देहरादून में स्थित है। यहां से गोविंदघाट के लिए टैक्सी या बस की सुविधा उपलब्ध है। गोविंदघाट से निकटतम रेलवे स्टेशन 270 किलोमीटर दूर ऋषिकेश में स्थित है। यहां से लगातार बसें चलती रहती हैं जिससे गोविंदघाट तक पहुंचा जा सकता है। गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब पहुंचने के लिए 19 किलोमीटर की चढ़ाई करनी पड़ती है।

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