इस गुरुद्‌‌वारे में रखे पत्थर पर आज भी मौजूद हैं गुरुनानक देव जी के शरीर के निशान

by Ravinder Singh

लेह से लगभग 25 किलोमीटर पहले जम्मू कश्मीर (jammu and kashmir) का बेहद दिलचस्प टूरिस्ट स्पॉट गुरुद्वारा पत्थर साहिब (gurudwara shri pathar sahib) है। यह गुरुद्वारा बहुत सुंदर है और यह सिख धर्म के संस्थापक पहले गुरु, गुरु नानक देव जी की स्मृति में बनाया गया था। गुरु नानक देव जी अपनी दूसरी यात्रा के दौरान जम्मू कश्मीर और लद्दाख आए थे। गुरु जी जिस जगह भी ठहरे वहां उनका गुरुद्वारा बन गया। गुरुद्वारा पत्थर साहिब इस क्षेत्र की आस्था का केंद्र है। यहां हर साल बड़ी संख्या हर धर्म से जुड़े श्रद्धालु पहुंचते हैं। भारतीय सेना के जवान भी नियमित रूप से गुरुद्वारा पत्थर साहिब पहुंचते हैं। इस गुरुद्वारे का निर्माण भारतीय सेना के द्वारा करवाया गया है।

गुरुद्वारे का इतिहास

मान्यता है कि 1517 ई में गुरु नानक देव जी सुमेर पर्वत पर अपना उपदेश देने के बाद नेपाल, सिक्किम, तिब्बत होते हुए लेह पहुंचे थे। लेह की पहाड़ी पर उन्हें लोगों ने एक राक्षस के बारे में बताया जो लोगों को प्रताड़ित करता था। लोगों की बात सुनकर गुरु नानक देव जी नदी के किनारे आसन लगाया। यह देख राक्षस गुस्सा हो गया और गुरु नानक देव जी को मारने की योजना बनाने लगा। एक दिन जब गुरु नानक देव जी भगवान का ध्यान कर रहे थे, राक्षस ने इसका लाभ उठाकर एक बड़ा पत्थर फेंक दिया। जैसे ही पत्थर गुरु जी को छुआ, पत्थर मोम जैसा बन गया और गुरु जी के शरीर पर पत्थर गढ़ गया। हालांकि गुरु नानक देव जी पर इसका कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद राक्षस ने पहाड़ से उतरकर देखा तो वह हैरान रह गया कि गुरु नानक देव जी तब तक जिंदा थे। इसके बाद उसने गुस्से में आकर अपना पैर जोर से पत्थर पर मारा, लेकिन उसका पैर पत्थर में धंस गया। इसके बाद राक्षस को अपनी गलती का अहसास हुआ और वह गुरु नानक देव जी के चरणों में गिर गया।

gurudwara shri pathar sahib

Source – Famous Places In India

आज भी मौजूद है पत्थर

राक्षस ने जो पत्थर गुरु नानक देव जी पर फेंका था, वह आज भी यहां मौजूद है। पत्थर पर गुरुनानक देव जी के शरीर के निशान भी मौजूद हैं। हालांकि मान्यता है कि लंबे समय तक यह पत्थर विलुप्त हो गया था, लेकिन 1970 में जब लेह-निमू रोड़ का कंस्ट्रक्शन शुरू हुआ, तब यह पत्थर फिर मिला। इसके बाद भारतीय आर्मी ने यहां गुरुद्वारा बनवाया। इस समय गुरुद्वारा पत्थर साहिब की देखभाल का जिम्मा भारतीय सेना के पास है। यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

कैसे पहुंचें पत्थर साहिब

यह प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्रीनगर-लेह रूट पर लेह से लगभग 25 किलोमीटर पहले आता है। श्रीनगर से टैक्सी, बस या पर्सनल कार से यहां पहुंचा जा सकता है। यहां जाने के लिए रेल यातायात की सुविधा उपलब्ध नहीं है। यहां से नजदीकी लेह हवाई अड्डा लगभग 22 किलोमीटर दूर है।

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Web Title gurudwara shri pathar sahib

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