बैजनाथ मंदिर में चार क्विंटल मक्खन से किया जाएगा भोलेनाथ का श्रृंगार, सात दिन चलेगा पर्व

by Ravinder Singh

हिमाचल प्रदेश (himachal pradesh) के कांगड़ा जिले में विश्व प्रसिद्ध शिव मंदिर बैजनाथ (baijnath temple) में हर साल की तरह इस बार भी मकर संक्रांति  (makar sankranti) पर घृत मंडल पर्व (ghrit mandal parv) का आयोजन किया जा रहा है। सात दिनों तक चलने वाले घृत मंडल पर्व में चार क्विंटल देसी घी और मेवों से भगवान शिव का श्रृंगार किया जाएगा। भगवान शिव का श्रृंगार करने के लिए मंदिर कमेटी की ओर से तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं। मकर संक्रांति के दिन रात को घृतमंडल तैयार किया जाएगा। इसके लिए देसी घी को ठंडे पानी में 108 बार धोकर मक्खन तैयार किया जाता है। इस मक्खन से घृत मंडल तैयार किया जाएगा और इस मक्खन को पिंडी पर चढाया जाता है।

मक्खन से दूर होते हैं चरम रोग

मंदिर के पुजारियों का कहना है कि घृत मंडल पर्व 14 जनवरी से शुरू होकर 21 जनवरी को खत्म होगा। इन सात दिनों तक श्रद्धालु शिवलिंग पर चढ़े घृत मंडल के दर्शन करते हैं। आखिरी दिन मक्खन को पिंडी से उतारकर श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। पुजारियों का कहना है कि यह मक्खन रूपी प्रसाद चर्म रोग, कुष्ठ रोग आदि को ठीक करने के लिए लाभदायक होता है। इस प्रसाद को लेने के लिए घृत मंडल पर्व के आखिरी दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं।

ghrit mandal parv baijnath

Source – punjab kesari

राजा भीमसेन ने शुरू की थी परंपरा 

मान्यता है कि कैलाश पर्वत पर सर्दी पड़ने के कारण भगवान शिव यहां आकर निवास करते हैं। उन्हें आराम देने के लिए ही शिवलिंग पर शुद्ध घी से तैयार किए गए मक्खन का लेप लगाया जाता है। यह परम्परा यहां सालों से चली आ रही है। माना जाता है कि मंडी के राजा भीमसेन भी यहां आकर शिवलिंग पर मक्खन का लेप लगाया करते थे। राजा ने यहां से शिवलिंग को उखाड़कर मंडी में स्थापित करने की कोशिश की थी, लेकिन मां गौरी सहित भोलेनाथ ने दर्शन देकर बता दिया कि शिवलिंग को उखाड़ने की कोशिश की, तो सर्वनाश हो जाएगा। इसके बाद राजा ने यहां शिवलिंग पर मक्खन का लेप लगाने की परंपरा शुरू की थी और यह आज भी जारी है।

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Web Title ghrit mandal parv baijnath

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