देहरादून में खूला राज्य का पहला स्नेक हाउस, देखने को मिलेगी अजगर 12 से भी अधिक प्रजातियां

by Content Editor

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून हमेशा से ही देसी और विदेशी पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र रही है। जिस वजह से यहां हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं। अब इस शहर की खूबसूरती में चार-चांद लगाने राजधानी के चिड़ियाघर में तरह-तरह के सांपों की एक अलग ही दुनिया देखने को​ मिलेगी। बता दें कि राजधानी दून (dehradun) में राज्य का पहला स्नेक हाउस (first snake park) खोला गया है। इस हाउस में सांप, अजगर की 12 प्रजातियां देखने को मिलेगी। केंद्रीय चिडियाघर प्राधिकरण से अनुमति मिलने के बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया है।

प्रदेश के गढ़वाल मंडल में देहरादून जू और कुमाऊं मंडल में नैनीताल में चिड़ियाघर हैं। दोनों ही चिड़ि‍याघरों में सांपों के लिए कोई हाउस नहीं है। नैनीताल में सर्द मौसम होने के कारण सांप नहीं पनप सकते हैं। दून में मौसम अनुकूल होने की वजह से केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के मानक अनुसार योजना बनाकर स्नेक हाउस खोला गया है। इस स्नेक हाउस में किंग कोबरा, वर्मीज अजगर, रसेल, भारतीय नाग, कामन सेंडबोआ, रेटीकुलेट पायथन, राक पायथन, वॉल पायथन, वाइन पायथन, धामण समेत 10 प्रजातियों के सांप देखने का मौका मिलेगा। इसके अलावा पर्यटक इन सांपों के साथ अमेरिका समेत कई देशों में पाई जाने वाली इगुआना प्रजाति की छिपकली को भी देख सकेंगे।

first snake park in dehradun zoo

उद्घाटन के मौके पर प्रवेश के वन मंत्री ने कहा कि दून चिड़ियाघर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी नई पहचान बना रहा है। आने वाले दिनों में दून चिड़ियाघर में पर्यटकों के लिए और अधिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। कार्यक्रम में प्रमुख वन संरक्षक ने कहा कि यह स्नेक पार्क देश के चुनिंदा स्नेक पार्कों में से एक है और राज्य का पहला है। पार्क में कुछ स्थानीय सांपों के अलावा दूसरे राज्यों में पाए जाने वाले सांपों को रखा गया है।

चेन्नई व बंगलूरू स्नेक पार्क से लाए गए सांप
स्नेक पार्क में रखे गए सांपों की कई प्रजातियों को चेन्नई व बंगलूरू स्नेक पार्क से विशेषज्ञों की देखरेख में लाया गया है। पर्यटक यहां 11 प्रजाति के सांपों के साथ ही अमेरिकी देशों में पाई जाने वाली इगुआना प्रजाति की छिपकली को भी देख सकेंगे।

कैक्टस पार्क का भी उद्घाटन
मसूरी-देहरादून मार्ग पर पांच हेक्टेयर क्षेत्र में बनाया गया मिनी जू एक बेहतरीन टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में उभरता जा रहा है। उत्तराखंड वन विभाग इस जू का संचालन करता है। यहां 27 प्रजाति के 344 पशु-पक्षियों के साथ ही उत्तराखंड का पहला सबसे बड़ा एक्वावेरियम कैक्टस गार्डन और 3डी थियेटर इसे विशेष बना देते हैं। 450 से अधिक कैक्टस और सकुलेंटस प्रजातियों वाला गार्डन इसका आकर्षण है। ये कैक्टस गार्डन भी उत्तराखंड का पहला है। कैक्टस पार्क में देश के साथ ही विदेशों में पाए जाने वाले कैक्टस लगाए गए हैं।

जू से रिकॉर्ड राजस्व
वन विभाग ईको फ्रेंडली सिस्टम के तहत बनाया गया है। जू देहरादून-मसूरी आने वाले पर्यटकों की पहली पसंद बन रहा है। इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पिछले वित्तीय वर्ष में इस जू में रिकॉर्ड सात लाख पर्यटक पहुंचे। जिससे जू प्रशासन को सवा दो करोड़ रुपये की कमाई हुई। ये देहरादून या उसके आसपास किसी भी पर्यटक स्थल से मिलने वाला सर्वाधिक राजस्व है।

मिनी जू को मिल चुके हैं दो ISO सर्टिर्फिकेट
क्वालिटी मैनेजमेंट और एन्वायरमेंटल मैनेजमेंट के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठन ISO से इस जू को दो-दो सर्टिर्फिकेट मिल चुके हैं। 1976 में मालसी डियर पार्क के नाम से स्थापित इस पार्क को 2015 में मिनी जू का दर्जा हासिल हुआ। जू में बेहद कम संसाधन के बावजूद बिजली, पानी से लेकर प्लास्टिक कचरे का बेहतर प्रबंधन इसे सबसे अलग बना देता है।
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Web Title first snake park in dehradun

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