वैलनेस टूरिज्म से संवरेगा राज्य का पर्यटन, हर साल होता है 80 से 90 करोड़ रुपये का कारोबार

by Content Editor

हिल स्टेशनों (hill stations) पर पर्यटन और तीर्थाटन के बाद वेलनेस टूरिज्म (wellness tourism) भी धीरे धीरे भी बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि कोरोना काल के बाद लोग फिटनेस की तरफ ज्यादा ध्यान देंगे, फिर चाहे वो फिजिकल फिटनेस हो या फिर मेंटल फिटनेस हो। उत्तराखंड (uttarakhand) में इन दिनों पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह ठप हैं। सरकार ने चारधाम यात्रा शुरू कर दी है, लेकिन लॉकडाउन के चलते इससे भी कोई खास असर देखने को नहीं मिल रहा है। कोरोना के चलते हालात सामान्य होने में काफी समय लग सकता है। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों को देखते हुए उत्तराखंड (Uttarakhand) की खूबसूरत वादियों में वेलनेस टूरिज्म (wellness tourism) की संभावनाओं ने उम्मीद के द्वार खोले हैं। वजह यह है कि योग-ध्यान, स्पा, पंचकर्म समेत प्राकृतिक उपचार के लिए देश से ही नहीं विदेश से भी पर्यटक उत्तराखंड की ओर रुख करते हैं। इसे देखते हुए राज्य सरकार भी इस दिशा में कदम उठाने में जुट गई है।

बता दें कि उत्तराखंड में हर साल आने वाले पर्यटकों की संख्या औसतन 3.5 करोड़ रहती है। पर्यटन में भी 44.2 फीसद की भागीदारी यहां आने वाले श्रद्धालुओं की होती है। वर्तमान में कोरोना संकट के कारण पर्यटन के साथ ही तीर्थाटन से जुड़ी सभी गतिविधियां बंद हैं, तो इससे राज्य के राजस्व पर भी असर पड़ा है। इसे देखते हुए पर्यटन के ऐसे विकल्पों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिसमें शारीरिक दूरी के मानकों का पालन करते हुए कम संख्या में लोग आएं और आय भी अधिक हो। इस लिहाज से राज्य में वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देने को मुफीद माना जा रहा है।

Development of wellness tourism in uttarakhand

Source: medium.com

80 से 90 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ वैलनेस टूरिज्म से

वर्तमान में योग, ध्यान और आध्यात्म के क्षेत्र में दुनियाभर में पहचान बना चुकी तीर्थनगरी ऋषिकेश अब वैलनेस टूरिज्म का भी केंद्र बन गई है। इसका अंदाजा प्रतिवर्ष यहां हो रहे 80 से 90 करोड़ रुपये के वैलनेस कारोबार से लगाया जा सकता है। इसके अलावा औसतन 30 से 40 हजार लोग हर साल यहां इस टूरिज्म का लुत्फ उठाने पहुंचते हैं। अगर सरकार इस सेक्टर पर और ध्यान दे, तो यह राज्य की आर्थिकी का बड़ा जरिया बन सकता है। वेलनेस के प्रति बढ़ते क्रेज को राज्य में बढ़ते वेलनेस सेंटरों के रूप में भी देखा जा सकता है। मौजूदा समय में ऋषिकेश, मुनिकीरेती, स्वर्गाश्रम, लक्ष्मणझूला, पौड़ी, उत्तरकाशी, चमोली, टिहरी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, नैनीताल, बागेश्वर व चंपावत क्षेत्रों में 172 के करीब योग-ध्यान केंद्र अस्तित्व में आ चुके हैं। पिछले तीन वर्षों की बात करें तो इस टूरिज्म के लिए करीब डेढ़ लाख से अधिक पर्यटक ऋषिकेश क्षेत्र में पहुंचे हैं।

छह माह चरम पर रहता वैलनेस टूरिज्म

सितंबर से फरवरी माह के बीच वैलनेस टूरिज्म अपने चरम पर रहता है। मार्च माह में तीर्थनगरी में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में विश्व के कोने कोने से योग साधक जुटते हैं, जो न सिर्फ योग महोत्सव तक ही सीमित रहते हैं, बल्कि इसके बाद वैलनेस की अन्य गतिविधियों के लिए भी यहां पर वक्त गुजारते हैं। पर्यटकों के तौर पर वैलनेस टूरिज्म को देखें तो इसे लेकर अभी तक सबसे अधिक क्रेज विदेशियों में है। संख्या के रूप में यह अनुपात 80:20 का रहता है। बदली परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले सालों में यह एक बेहतर विकल्प के तौर पर उभर रहा है।

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