ऋषिकेश की चौरासी कुटिया ने दिलाई भारतीय योग को खास पहचान, बीटल्स बैंड ने ली थी ध्यान की दीक्षा

by Ravinder Singh

देवभूमि उत्तराखंड (uttarakhand) के देहरादून जिले में स्थित ऋषिकेश (rishikesh) को एक पवित्र तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है। यह हिमालय पर्वत के किनारे बसा एक बेहद ही शांति देने वाला शहर है। ऋषिकेश (rishikesh) को योग का केंद्र भी कहा जाता है। ऋषिकेश के करीब ही एक आश्रम है, जिसे बीटल्स आश्रम (beatles ashram) या चौरासी कुटिया (chaurasi kutia) कहा जाता है। भारतीय योग को दुनियाभर पहचान दिलाने में चौरासी कुटिया और यहां रहने वाले प्रसिद्ध संत महर्षि महेश योगी (maharishi mahesh yogi) का बड़ा योगदान है। यहां बनी 84 कुटिया वास्तुकला का अद्भुत नमुना है। इस कुट‌िया से दुन‌िया के कई बड़े बैंड भी इत‌िहास रच चुके हैं। विदेशी सैलानियों के बीच चौरासी कुटिया काफी प्रसिद्ध है। तो चलिए बीटल्स आश्रम या चौरासी कुटिया (chaurasi kutia) के इतिहास पर एक नजर डालते हैं।

जमीन लीज पर लेकर बनाई थी 84 कुटिया

छत्तीसगढ़ में जन्मे महेश वर्मा प्रसाद 40 से 50 के दशक में हिमालय में अपने गुरू से ध्यान और योग की शिक्षा लेने के बाद संत महर्षि महेश योगी बन गए। 60 के दशक में महर्षि महेश योगी ने उत्तर प्रदेश सरकार से 20 साल के लिए यह जमीन लीज पर लेकर 84 कुटिया बनवाई थी। आश्रम को स्थिरता प्रदान करने के बाद महर्षि महेश योगी ने अपने कार्यकलापों को पश्चिमी देशों मुख्यतः यूरोप में स्थानांतरित किया। पश्चिमी देशों में ऐसे लोग जो संयमित जीवन जीना चाहते थे, वह महर्षि महेश योगी के अनुयायी बन गए। इस दौरान ब्रिटेन के मशहूर रॉक बैंड बीटल्स के सदस्य महर्षि से इतने प्रभावित हुए कि वह उत्तरी वेल्स में महर्षि के साथ सप्ताहांत बिताया करते थे।

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Source – Inditales

बीटल्स ग्रुप ने दिलाई पहचान

साल 1968 में महर्षि महेश योगी ने चौरासी कुटिया (chaurasi kutia) में अंतरराष्ट्रीय ध्यान शिक्षण शिविर का आयोजन किया। इस आयोजन में दुनियाभर के 60 अंतरराष्ट्रीय मैडिटेशन एक्सपर्ट पहुंचे। इसके बाद विदेशी पर्यटकों का चौरासी कुटिया आना-जाना शुरू हो गया। 16 फरवरी 1968 को बीटल्स ग्रुप के सदस्य जॉन लिनोन, पॉल मेकार्टनी, जार्ज हेरिशन व रिगो स्टार चौरासी कुटिया आए। वह करीब एक साल तक चौरासी कुटिया में रहे और भावातीत ध्यान की दीक्षा ली। यहां रहते हुए बीटल्स ग्रुप के सदस्यों ने 48 गीतों की रचना की। इन गीतों ने बाद में पूरे विश्व में धूम मचाई। बीटल्स ग्रुप ने चौरासी कुटिया और योग को विश्व के मानचित्र पर खास जगह दिलाई। बीटल्स ग्रुप के अलावा हॉलीवुड की कई नामचीन हस्तियां भी यहां आ चुकी हैं।

दुनिया-भर से पहुंचते हैं पर्यटक

साल 1975 में महर्षि महेश योगी के भतीजे ने यहां पर गोल पत्थर के गुंबद वाले 125 कॉटेज का निर्माण कराया था। इन कॉटेज में ध्यान स्थल, शयन कक्ष और शौचालय की सुविधा मुहैया कराई गई। हालांकि साल 1983 में चौरासी कुटिया को राजाजी नैशनल पार्क में शामिल कर लिया गया और इसी के साथ यहां पर्यटक गतिविधियों को सीमित कर दिया गया। धीरे-धीरे यह बंद हो गईं और यह क्षेत्र वीरान हो गया। करीब तीन दशक बाद साल 2015 में चौरासी कुटिया को एक बार फिर पर्यटकों के लिए खोला गया। इसके बाद से पूरे साल दुनिया भर के बीटल्स के दीवाने यहां आकर इस धरोहर का दीदार करते हैं।

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Source – Amar Ujala

कैसे पहुंचें चौरासी कुटिया

ऋषिकेश में होने के कारण यहां पहुंचना बहुत ही आसान है। ऋषिकेश से नजदीकी हवाई अड्डा लगभग 46 किलोमीटर दूर देहरादून में है, जबकि निकटतम रेलवे स्टेशन लगभग 20 किलोमीटर दूर हरिद्वार में स्थित है। दोनों ही जगहों से बस या टैक्सी की मदद से आसानी से ऋषिकेश तक पहुंचा जा सकता हैं। ऋषिकेश सड़क मार्ग द्वारा उत्तराखंड के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। ऋषिकेश दिल्ली, देहरादून और हरिद्वार जैसे आसपास के शहरों से नियमित बस सेवाओं द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। इन शहरों से प्राइवेट और राज्य स्वामित्व की बसों का लाभ ले सकते हैं।

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