तमिलनाडु और किन्नौरी कारीगर पौराणिक पहाड़ी शैली में तैयार करेंगे मां भंगायणी मंदिर को

by Content Editor

हिमाचल प्रदेश (Himachal) के किन्नौर जिले में हरिपुरधार (Haripurdhar) में स्थित मां भंगायनी मंदिर (Bhangayani Temple) श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। यह मंदिर उत्तरी भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में शामिल है, जो समुद्र तल से लगभग 2500 मीटर यानी 7500 हजार फुट की ऊंचाई पर है। पिछले दो दशकों से यह मंदिर देश भर में काफी प्रसिद्ध हुआ है, जिस वजह से हरिपुरधार मंदिर कमेटी ने मंदिर काे नया रूप देने का फैसला किया है। इसे लेकर कमेटी ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

मां भंगायनी का मंदिर अब पौराणिक पहाड़ी शैली में​ नजर आएगा। साथ ही मंदिर के परिसर में माता की प्रतिमा भी लगाई जाएगी, जिसकी लागत 20 से 25 लाख रुपये आएगी। माता भंगायणी मंदिर को लकड़ी और स्लेटनुमा पत्थर की शैली से नक्काशी के साथ बनाया जाएगा। मंदिर को नया रूप देने के लिए तमिलनाडु और किन्नौर से खासतौर पर कारीगरों को बुलाया जाएगा।

Maa Bhangayani Temple Haripurdhar

माता भंगायनी मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचते हैं। लाखों लोगों की कुल देवी माता भंगायनी मंदिर में मनोकामना मांगने व पूर्ण होने पर सबसे अधिक श्रद्धालु उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से पहुंचते हैं। यहां पर समिति की और से रोजाना दो हजार श्रद्धालुओं के ठहरने व खाने-पीने की व्यवस्था की जाती है। मंदिर के समीप एक हैलिपैड का निर्माण किया जा रहा है, जिसका कार्य लगभग पूरा हो चुका है। हैलिपैड के लिए जल्द ही सरकार से मंजूरी लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

शिरगुल महाराज की मुंह बोली बहन हैं भंगयाणी माता

मान्यता है कि भंगायनी माता ने श्रीगुल महाराज देवता को दिल्ली जेल से मुक्त कराया था। भंगायनी माता को भगवान शिव के अवतार माने जाने वाले शिरगुल महाराज की मुंह बोली बहन माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जब शिरगुल जी महाराज दिल्ली गए थे, तो उनकी ख्याति देखकर मुगल शासक ने उन्हें चमड़े की जंजीरों में बंदी बना लिया था। चाहकर भी भगवान शिरगुल चमड़े की जंजीर नहीं तोड़ सकते थे। तब भंगयाणी माता ने उन्हें बंधन मुक्त कराया था।

सोलह से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर हरीपुरधार में माता भंगायनी मंदिर में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती ही जा रही है। इसलिए इस जगह पर सुविधाओं को बढ़ाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। मां भंगायणी मंदिर 1986 से पूर्व एक देवठी के रूप में था। जिसका जीर्णोद्धार 1986 से यहां मंदिर कमेटी ने शुरू किया। 1992 से 2000 के बीच यहां सक्रिय होकर मंदिर निर्माण का कार्य आरंभ किया गया। मंदिर कमेटी यहां पर अभी तक पार्किंग, भव्य पहाड़ी शैली का द्वार, डेढ़ किलोमीटर पक्के रास्ते का निर्माण, लंगर हॉल, यात्री धर्मशाला और मंदिर पुस्तकालय का निर्माण करवा चुकी है।

Bhangayani Temple Haripurdhar Himachal

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