जब माता अनुसूया के सामने त्रिदेव को बनना पड़ा था शिशु, इस मंदिर में जाने पर मिलता है संतान का वरदान

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उत्तराखंड (uttarakhand) के चमोली (chamoli) में अनुसूया देवी का मंदिर (anusuya devi temple) श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। यह मंदिर चमोली से 10 किलोमीटर दूर गोपेश्वर (gopeshwar) नाम की जगह पर है। ऐसा कहा जाता है कि इस जगह पर त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) को भी विवश होकर शिशु रूप धारण करना पड़ा था। कई सालों के कठिन तप के बाद वह पुनः अपने स्वरूप में आ सके थे। ऐसी भी मान्यता है कि यहां आकर निःसंतान दंपत्ति को ईश्वर की कृपा से संतान का वरदान मिलता है।

इस मंदिर के बारे में कथा प्रचलित है कि अत्रि मुनि ने तपस्या के लिए यह स्थान बनाया था। यहीं पर उन्होंने पत्नी अनुसूया के साथ मिलकर एक कुटिया का निर्माण किया था, जहां दोनों साथ रहते थे। देवी अनुसूया पतिवर्ता स्त्री थी, उनकी प्रसिद्धि तीनों लोक में फैल गई थी। जिसे देख देवी पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के मन में ईर्ष्या का भाव उत्पन्न हो गया था। ऐसे में तीनों देवियों ने मिलकर देवी अनुसूया की परीक्षा लेने की ठानी और अपने पतियों भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा जी को अनुसूया के पास परीक्षा लेने के लिए भेजने की योजना बनाई। जिस पर तीनों भगवान ने उन्हें काफी समझाया, लेकिन पत्नी हठ के आगे विवश होकर उन्हें परीक्षा लेने जाना पड़ा।

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शिशु बन जाते हैं त्रिदेव
तीनों भगवान साधु के वेश में देवी के पास पहुंचते हैं और भोजन मांगने लगते हैं। जब देवी अनुसुया भोजन लेकर आती हैं, तो त्रिदेव शर्त रखते हैं कि देवी को निर्वस्त्र होकर भोजन कराना होगा तभी वह उसे ग्रहण करेंगे। इस परिस्थिति में देवी आंखें मूंदकर अपने पति को याद करती हैं। जिससे उन्हें दिव्य दृष्टि प्राप्त होती है और वह जान लेती हैं कि साधुओं के वेश में त्रिदेव उनके सामने हैं। तब देवी अनुसूया कहती हैं जैसा साधु चाहते हैं वैसा जरूर होगा, लेकिन साधुओं को शिशु रूप में उनका पुत्र बनना होगा। इसे सुनकर तीनों देव शिशु रूप में बदल जाते हैं और देवी अनुसूया निर्वस्त्र होकर तीनों देवों को भोजन करवाती हैं। इस तरह त्रिदेव अनुसूया के पुत्र बनकर रहने लगते हैं। अंत में तीनों देवियां दुखी होकर अनुसूया के पास जाकर माफी मांगती हैं और अपने पतियों को बाल रूप से मूल रूप में लाने के लिए प्रार्थना करती हैं। जिसे देवी अनुसूया स्वीकार करती हैं और तीनों देवता पुनः अपने स्वरूप में आ जाते हैं।

कैसे पहुंचें अनुसूया मंदिर
सबसे पहले पर्यटकों को ऋषिकेश पहुंचना होगा। ऋषिकेश से 250 किलोमीटर दूर चमोली सड़क मार्ग से पहुंच सकते हैं। वहां से 10 किलोमीटर की दूरी पर गोपेश्वर है। लोकल वाहन का सहारा लेकर मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। वहीं हवाई मार्ग से पहले देहरादून पहुंचना होगा। जहां से चमोली या गोपेश्वर के लिए बस मिल जाएगी। रेल यात्रा के लिए ऋषिकेश तक पहुंचने के बाद बस से चमोली तक का सफर आसानी से तय किया जा सकता है‌।

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Web Title anusuya devi temple in gopeshwar 10 km from chamoli uttarakhand

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